रांची : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक व संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य,प्रखर वक्ता व विचारक इंद्रेश कुमार ने सोमवार को हिन्दू जागरण मंच के योजनानुसार फेसबुक लाईव के माध्यम से सम्बोधित करते हुए कहा की, शाश्वत सत्य यही है स्वर्ग, नरक आत्माओं को समाज है। आत्मा नारी के कोख में प्रवेश करती है। आत्मा को शरीर का आवरण मिलता है। मनुष्य की पहचान,जाति पन्थ,परम्परा,बुजुर्गों से नहीं होती, केवल राष्ट्र से व्यक्ति की पहचान होती है। अरब के लोग,अरबी। अमेरिका के लोग अमेरिकी आदि। 224 ईसाइयत पन्थ बन गया टकराव संघर्ष है। बौद्धों के भी 18 से उप पन्थ हुआ सभी मे संघर्ष है।
पूरा विश्व कोरोना महामारी से जूझ रहा है। कोरोना चीन के वुहान प्रयोगशाला में तैयार किया गया है जिसकी रचना अर्धविकसित है। इसके कारण इसकी दवा या वैक्सीन बनाया जाना अबतक सम्भव नहीं हुआ है। कोरोना योद्धाओं ने जो जीवटता दिखाई है वो वन्दनीय व नमनीय है।
कोई भी विकसित देश कोरोना को सामना नहीं कर सका। जितनी भी विकसित सभ्यता मानी गई,जिनको अपने पर गर्व थी वो सारी सभ्यताएं कोरोना वाइरस के आगे पस्त हो गई। उनको ज्ञात हो गया उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है ये सभी को पता चल गया। विश्व समुदाय के सामने विकसित व विकासशील शब्द को पुनः व्यख्या करने होंगे, ये अधूरा है। इस वायरस से संघर्ष करने के लिए देश के प्रधानमंत्री ने ठोस योजनाएं बनाकर सफल रणनीति बनाई। हमारी अनेकों विशेषताएं सामने आई हैं। हमारा सारा समाज, आर्थिक रूप से पिछड़ा है लेकिन ईश्वर पर विश्वासी है जिसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता दुनिया के बाकी देशों के तुलना में अधिक रहा। मार्च के अंत तक कोरोना नियंत्रण में था लेकिन तब्लीकि जमाती कोरोना वायरस से संक्रमित थे जिन्होंने देश भर में फैल गए। जो किसी भी व्यवस्था को नहीं मानते थे। जिनके व्यवहवार अमानवित, कट्टर था। इन्हें अशोभनीय दृश्य था। इस्लाम शर्मशार हुआ। मोहम्मद साद को छुपने के बजाय सामने आते और सभी को बताते,अपनी गलती स्वीकार करते लेकिन। उनमें तो सत्य सही से स्वीकार करने की हिम्मत नहीं। उनके कारण कोरोना भारत मे विस्फोटक हुआ।
कोरोना का संरचना,संस्कृति का पता नहीं होने के कारण अभी तक कोई ठोस इलाज नहीं सम्भव। कुछ वैकल्पिक दवाओं से कोरोना से निपटा जा रहा। भारत ने विश्व को दवाई नहीं भेजी। आज भी विश्व मे कोई प्रधानमंत्री नहीं जो दुनिया को विश्वास दिला सके, हाल चाल पूछ सके। प्रधानमंत्री पूरे विश्व को दिलाशा भी दिला रहे और कुशल क्षेम भी पूछ रहे हैं। भारत और भारत के नेतृत्त्व में मानवीय गुण दिखा। सभी से एक समानव्यवहार कर रहे हैं। अपने आलोचकों को भी प्रधानमंत्री ने कभी जवाब नहीं दिया। प्रधानमंत्री ने मानवीय गुण को प्रकट किया। जनता की भी भूमिका सराहनीय है।
उन्होंने कहा की धर्मांतरण ईश्वरीय विरुद्ध व अमानवीय कार्य है। साथ ही उन्होंने आह्वान की छुआछुत, भेदभाव भी एक वायरस है। कोरोना के तरह इससे भी हमसबको लड़ना है। एक सम्मानपूर्वक जीवन का संकल्प लें। भारत भारतीय भारतीयता व हिन्दू,हिंदुस्तान व हिन्दुतत्व के साथ आर्य, आर्यावर्त का बोध सदा जागृत रहे।
