रांची : राज्य की सेक्युलर सरकार ने पिछले दिनों रांची के मुसलिम बहुल क्षेत्र हिंदपीढ़ी में विधि व्यवस्था बनाये रखने के लिए मुसलमान धर्म के पुलिस पदाधिकारियों की नियुक्ति की है। भाजपा विधायक दल के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री श्री बाबूलाल मरांडी ने सरकार के इस निर्णय को खतरनाक बताते आपत्ति जताई है। साथ ही इसे वापस लेने की मांग की है। सीएम हेमंत सोरेन को इस संबंध में पत्र लिखकर श्री बाबूलाल ने कहा है कि ऐसे निर्णय के दूरगामी परिणाम बहुत ही घातक होंगे। सरकार अगर यह सोच रही है कि धार्मिक आधार पर धर्म विशेष के पदाधिकारियों की नियुक्ति से लाभ मिलेगा तो यह एक गलत और घातक कदम है। सरकार इस पर पुनर्विचार करे। श्री बाबूलाल मरांडी ने आगे कहा है कि किसी भी समाज में विधि व्यवस्था में धार्मिक आधार पर विभाजन समाज में विकृतियों को जन्म देगा। इसका असर लम्बे समय तक रहेगा और समाज में एक बड़ी खाई बनेगी। सरकार को यह सोचना चाहिये कि भविष्य में अगर ऐसी ही समस्या किसी बहुसंख्यक इलाके में उत्पन्न हो जाए और वहां धर्म विशेष के पुलिस या प्रशासनिक पदाधिकारी को हटाने की मांग हो जाये तो स्थिति मुश्किल हो सकती है। धर्म विशेष के पदाधिकारियों की नियुक्ति किये जाने के मामले में राज्य सरकार अविलम्ब अपने कदम पीछे हटाये। इस मामले में जिस किसी पदाधिकारी के मन में यह भाव आया है उसपर अविलम्ब करवाई जाय। यहां यह बताना प्रासंगिक होगा कि पिछले दिनों हिंदपीढ़ी में एक महिला के कोरोना पॉजिटिव होने की पुष्टि के बाद वहां जांच के लिए पहुंची मेडिकल टीम के साथ हुए मुसलिम समुदाय के साथ हुवे विवाद के बाद, इलाके में विधि व्यवस्था बनाये रखने के लिए अलग से मुस्लिम अफसरों की तैनाती की गयी है। जिनका काम लॉक डाउन को सफल बनाना और स्क्रीनिंग में प्रशासन को सहयोग करना है। डीएसपी रैंक के 4 अधिकारियों के अलावा, सीआइडी रैंक के तीन डीएसपी के अलावा पीसीआर, ट्रैफिक और राजधानी के विभिन्न थानों में तैनात करीब 45 मुस्लिम पुलिस अफसरों की तैनाती की गयी है।
झारखंड सरकार धार्मिक आधार पर समाज को बाँटने से परहेज़ करे। इसके लिए हमने मुख्यमंत्री @HemantSorenJMM को सुझाव दिए हैं।@JharkhandCMO@BJP4Jharkhand @BJP4India @AmitShah @JPNadda— Babulal Marandi (@yourBabulal) April 6, 2020
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