पितृ-ऋण के कारण एवं निवारण। - एक संदेश भारत

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शुक्रवार, मई 31, 2019

पितृ-ऋण के कारण एवं निवारण।

ज्योतिष डॉ रविंद्र प्रसाद 
हमारे सनातन धर्म में हिन्दू परिवार में गुरु,पुरोहित एवं कुलदेवी की मान्यता चली आ रही है। 
राम चरित मानस में लिखा है:
"गुरु वशिष्ठ कुल पूज्य हमारे।
इन्हीं के कृपा दनुज दल मारे।।"
भगवान् श्रीराम कहते हैं कि हमारे  गुरु विश्वामित्र, कुल गुरु वशिष्ठ एवं कुल देवी देवता पूज्य हैं। और,आगे उन्होंने कहा कि इन्हीं की कृपा से असुर सैन्य का संहार किया।
स्पष्ट है कि इन सबों की कृपा से ही घर परिवार में खुशहाली एवं मंगलमयता आती है।
   ज्योतिष मतानुसार पितृ-दोष के कारण सभी समस्याएं आने लगती हैं।
    पितृ-दोष का मुख्य कारण है " पुरोहित "का जाने अनजाने बदलना।अपने कुल ख़ानदान में एक ही पुरोहित होते हैं, जिन्हें " कुल पुरोहित "कहा जाता है।वह कभी परिवतनीय नहीं होते हैं। यदि किसी कारणवश कुल पुरोहित बदल दिया जाता है,तो उस कुल पर पितृ-ऋण के रुप में पितृ-दोष लग जाता है।

       इसका अरिष्ट प्रभाव इस प्रकार देखने को मिलता है :

(01) बालों पर सफेदी आने के साथ ही दुर्भाग्य का दौर शुरू हो जाना।
(02) पैसा खो जाना या चोरी होना।
(03) शिखा या चोटी स्थान पर से सिर के बाल झड़ने लगना।
(04) गले में माला पहनने की आदत।
(05) विद्या में रूकावट पड़ना।
(06) झूठे अभियोग / मुकदमा  चलना।
(07) अफवाहें उड़ना।
(08) निर्दोष होने पर भी जेल जाना।
    
निवारण हेतु सामान्य उपाय  :

( 01) खानदान के प्रत्येक व्यक्ति से धन रूपया-पैसा एकत्र कर मंदिर में दान दें।
(02) अपने घर के समीप मंदिर की सेवा करें।
(03) पीपल के वृक्ष को सींचें, देख-भाल करें।
(04) केवल गुरु को छोड़कर  अपने देव स्थल /अपने मंदिर/अपने पूजा घर में अपने पूर्वजों का चित्र न  लगायें। लगाने से पितृ-दोष में तीव्रता आ जाती है। और,वह निरंतर परेशानियों से घिरता जाएगा। 
  
 ज्योतिष डॉ  रवीन्द्र प्रसाद 

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