राजयोग में माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी का होने जा रहा है शपथ ग्रहण। ज्योतिषाचार्य श्री रविन्द्र प्रसाद
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| माननीय यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र भाई मोदी |
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| ज्योतिषाचार्य श्री रविन्द्र प्रसाद |
शपथ ग्रहण की कुण्डली वृश्चिक लग्न की बन रही है। जानिए, उनका जन्म लग्न भी वृश्चिक है और जन्म राशि भी वृश्चिक। शपथ लग्न वृश्चिक, जन्म लग्न वृश्चिक और जन्म राशि भी वृश्चिक। यह एक विशेष संयोग है।इतना ही नहीं जन्म भाग्येश चन्द्रमा है ,तो वहीं शपथ भाग्येश भी चन्द्रमा।जन्मांग में चन्द्र की महादशा चल रही है,जो दूसरी बार प्रधानमंत्री बनाने में सक्षम रहा। तीसरी बार भी प्रधानमंत्री बनेंगे ,क्योंकि नवम्बर 2021 से राज्येश/दशमेश मंगल की महादशा चलेगी।
शपथ ग्रहण का भाग्येश/नवमेश/धर्मेश/त्रिकोणेश चन्द्रमा मीन राशिगत् पंचमस्थ/त्रिकोणस्थ है,नव पंचम योग है।नवम त्रिकोण यानि लक्ष्मी भाव के चन्द्रमा का पंचम त्रिकोण लक्ष्मी भाव में स्थित होना,भारत की आर्थिक सुदृढ़ता का सूचक है। जन्म भाग्येश / धर्मेश चन्द्रमा और शपथ भाग्येश/धर्मेश चन्द्रमा का होना भारत की संस्कृति एवं भारत का धर्म सुसंस्थापित करने में सरकार सक्षम रहेगी। राष्ट्रधर्म, राष्ट्रवाद व राष्ट्र चेतना प्रखर होगी।
लग्नस्थ पंचमेश गुरु पर सप्तमस्थ राज्येश सूर्य एवं अष्टमेश बुध की दृष्टि पड़ रही है,जिसका मिला जुला असर रहेगा। राज्येश सूर्य की दृष्टि से राजकीय सेवाओं में नियुक्तियों होंगी,तो वहीं अष्टमेश बुध की दृष्टि से कुछ व्यवधान की सम्भावना दिख रही है। सप्तमस्थ बुधादित्य योग एवं लग्नस्थ गुरु का पारस्परिक दृष्टि शिक्षा,स्वास्थ्य, व्यापार एवं धर्म आदि में अपार वृद्धि की सम्भावना है।पंचमेश गुरु केन्द्रस्थ होने से लेखक, रचनाकार,साहित्यकार, कवियों एवं धर्मप्रेमियों की अभिनव अभिरुचि अभिनन्दनीय होगी।
30 मई 2019 ( गुरुवार) को रात्रि 09:51 बजे तक सर्वार्थसिद्धि योग है तथा शुभ चौघड़िया भी है। शपथ ग्रहण सर्वार्थसिद्धि योग एवं शुभ चौघड़िया में हो रहा है। सरकार के संख्या बल का विस्तार भी होगा।
रेवती नक्षत्र के चतुर्थ चरण में शपथ ग्रहण हो रहा है। ज्योतिष मान्यता के अनुसार रेवती नक्षत्र गण्डमूल नक्षत्र के अंदर आता है, जिसे आम भाषा में सतैसा नक्षत्र कहते हैं। साथ ही,अष्टमेश/मारकेश बुध की महादशा चल रही है,जो सप्तमस्थ/मारकस्थ है।यह एक कष्टकारक, कष्टदायक व अरिष्ट व अनिष्टकारक भी है। विरोधी दल परेशान करेंगे। लेकिन,केन्द्रस्थ गुरु सभी अरिष्टों का नाशक है :--
" किं कुर्वन्ति ग्रहाः सर्वे यस्य केन्द्रो वृहस्पति।
मत्तमात्तंगयुथानां यथा भिन्न्त्योऽपि केशरी ।।"
जैसे सिंह को देखते ही हाथियों का झुण्ड पलायन कर जाता है,ठीक उसी तरह केन्द्रस्थ गुरु के भय से सभी ग्रह शांत हो जाते हैं, कुछ नहीं बिगाड़ सकते हैं। फिर भी , हम जनता का कर्तव्य बनता है कि सर्वारिष्ट शांति के लिए शपथ ग्रहण/ राज्याभिषेक के समय सायं काल में यथा योग्य 05 या 11 घी का दीपक जरुर जलायें,हो सके तो दीपक में हल्दी का चूर्ण डाल दें,क्योंकि वृहस्पति की सबलता होगी,जिसे गुरु पूर्ण फलदायी हो सकेगा। एक संयोग भी है कि शपथ ग्रहण गुरुवार को है,अचला एकादशी भी है।
प्रस्तुति
डॉ रवीन्द्र प्रसाद
ज्योतिष शिरोमणि
सम्पर्क सूत्र 8804276009

