हिन्दू समाज के संरक्षण में पूज्य संतो की योगदान ! - एक संदेश भारत

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शनिवार, मई 25, 2019

हिन्दू समाज के संरक्षण में पूज्य संतो की योगदान !

हिन्दू समाज के संरक्षण में पूज्य संतो की योगदान  !

साधु-संत भारत की आत्मा हैं !

धर्मसंसद  प्रयागराज में योग गुरु पूज्य स्वामी रामदेव एवं सरसंघचालक परम पूजनीय डॉ मोहन भगवत जी 

संत समाज भारतवर्ष की एक बड़ी शक्ति है, समाज के सभी वर्ग के लोग किसी न किसी श्रद्धा केंद्र एवं संत परम्परा से जुड़े हैं! ईस्वी सन 712 में बिन कासिम ने सिंध पर हमला किया,कुछ हिन्दुओं को उन्होंने मुस्लमान बनाया,उसी क्षेत्र में देवल ऋषि ने समाज के जागरण के बल पर मुसलमान बने उन हिन्दुओं को पुनः हिन्दू धर्म में घरवापसी करवाकर हिन्दू बना लिया ! वैसे ही 1530 ईस्वी तक हिन्दू समाज के लोग अपनी जाती विरादरी  मतांतरित लोगो को अपने ही आधार पर हिन्दू बना लेते थे,लेकिन मुग़ल आगमन के बाद स्थिति बदल गयी ! मतांतरण की आंधी चल पड़ी,तब संतों ने आगे बढ़कर अपने समाज को बचाने का कार्य अपने  हांथो में लिया ! गुरु परंपरा ने बलिदान दिया पर अपना मत और धर्म नहीं बदला ! कबीर,चैतन्य महाप्रभु,रामानंद,सहित हजारो संत सामने आये व घरवापसी का कार्य किया ! चैतन्य महाप्रभु ने खुलेआम मुसलमानो को हिन्दू बनाने का काम किया ! संत रविदास ने सदन फ़क़ीर को हिन्दू बनाया और उसका नाम रामदास रखा ! विद्यारण्य स्वामी ने हरिहर और बुक्का को  हिन्दू बनाया और उन्होंने विजयनगर साम्राज्य की स्थापना किया ! मोहम्मद  तुगलक ने उसे मुसलमान बना लिया था, आर्य समाज के स्वामी श्रद्धानन्द ने शुद्धिसभा का गठन कर पुरे देश में पुनः हिन्दू  बनाने का वृहद् घरवापसी अभियान चलाया ! संत जीवनदास सतनामी सम्प्रदाय के संस्थापक थे ! उन्होंने मुगलों के अत्याचार से तंग आकर हथियार तक उठाया ! बाद में गुरु घासीदास ने सतनामी समाज को मतांतरित होने से बचाया ! संत समाज एक बड़ी शक्ति है उनके खड़े होने से हिन्दू समाज  की रक्षा होगी, विधर्मियों का कुचक्र रुकेगा,घरवापसी की प्रक्रिया हिन्दू समाज उनकी प्रेरणा से चला   सकेगा ! वर्तमान समय में भी अनेको संत उसी प्रकार के कार्यों को कर रहे हैं ! झारखण्ड में पूज्य रामरेखा बाबा एवं शिव चैतन्य ब्रह्मचारी ने भी उसी दिशा में अपने कार्यों को आगे बढ़ाया है ! स्वामी लक्ष्मणानंद (ओडिशा) में भी उसी कार्य में लगे थे ! गुजरात के दांग क्षेत्र में पूज्य असीमानंद जी,  दक्षिण भारत के पूज्य महर्षि दयानद सरस्वती  एवं पूज्य विश्वेश्वर जी महाराज भी घरवापसी के कार्यों को मजबूती प्रदान करते हुए हिंदुत्व चेतना जगाने का कार्य किये थे!

भारतीय संस्कृति में साधु,संत,महात्मा,पुजारी,पुरोहित,कथावाचक,भजनमंडली,कीर्तनमंडली एवं विभिन्न आधात्मिक व सांस्कृतिक संगठन के विद्वानों ने किसी न किसी रूप में धर्म के लिए कार्य  करते रहते हैं ! भारत का प्राण सनातन धर्म  में बस्ता है इसके सच्चे प्रहरी हमारे संत महात्मा रहे हैं ! इतिहास में कुछ ऐसे भी क्षण आये की लगा अब सब कुछ बिखर जायेगा ! विधर्मियों का आक्रमण इतना बर्बर एवं तेज था की लोग अपने धर्म संस्कृति से विमुख होने लगे थे ! ऐसे में हमारे साधु-संतों ने धर्म-रक्षा का कठिन कार्य अपने हांथो में लेकर पुन: उसे स्थापित किया ! अतः आज समय की मांग है की पुनः हमारे संत महात्मा फिर से इस पुण्य कार्य को अपने हांथो में लेकर हिन्दू  व  हिन्दुस्थान के संस्कृति सभ्यता व  सनातन धर्म का डंका संपूर्ण विश्व में बजाने के लिए आगे आएं ! 

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