झारखंड के जमशेदपुर में 8 हिंदू फल विक्रेताओं पर भा.द.वि. की धारा 107 के तहत प्राथमिकी दर्ज करते हुए "उन दुकानों में लगे विश्व हिंदू परिषद व बजरंग दल द्वारा अनुमोदित हिंदू फल दुकान के बैनर को" जमशेदपुर पुलिस ने झारखंड में चल रही कांग्रेस समर्थित हेमंत सोरेन के सरकार के दबाव में आकर हटाकर फल विक्रेताओं को बेवजह परेशान किया जा रहा है। मालूम हो कि जमशेदपुर के फल दुकान के तस्वीर के साथ एक जिहादी मुसलमान अहसान राज़ी के ट्वीटर यूजर ने झारखण्ड पुलिस को टैग करते हुए कार्रवाई करने की मांग की थी।
फिर क्या था झारखंड के हिंदू विरोधी सरकार ने अपने मुस्लिम वोट बैंक और कांग्रेसी आकाओं को खुश करने के लिए आनन-फानन में आदेश ट्विटर पर ही जमशेदपुर एसएसपी को जमशेदपुर पुलिस को टैग करते हुए कार्यवाही करने का आदेश थमा देती हैं। अब जमशेदपुर पुलिस ने बिना देर किए 8 हिंदू दुकानदारों को परेशान करने पहुंच जाती है। दुकानदारों को धमकाया जाता है और उन्हें डरा कर उस पोस्टर को हटवाते हुए 107 के तहत प्राथमिकी दर्ज कर देती है। और शांति भंग करने का आरोप लगा कर प्रताड़ित करना शुरू कर दिया जाता है।
मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए संबंधित फल दुकानों से पोस्टर हटवा दिया गया है तथा संबंधित दुकानदारों के विरुद्ध कदमा थाना द्वारा धारा – 107 द0प्र0स0 के तहत निरोधात्मक कार्रवाई की जा रही है। pic.twitter.com/AXGXNmaPWW— Jamshedpur Police (@Jsr_police) April 25, 2020
अब ऐसे में जो अहम सवाल उठता है वह यह कि क्या हेमंत सोरेन की हिंदू विरोधी सरकार सेक्युलरता के इस अंधी दौड़ में इस कदर दौड़ रही है कि अपने कांग्रेसी आकाओं को खुश करने के लिए हिंदुओं के मौलिक अधिकारों का भी हनन करेगी। क्या झारखंड में अपने प्रतिष्ठानों या दुकानों में हिंदू दुकान या हिंदू शब्द का प्रयोग करना क्या कानूनन जुर्म है। यदि हाँ तो झारखंड सरकार को यह बताना चाहिए कि पूरे झारखंड में हजारों ऐसे प्रतिष्ठान या दुकान है जिसमें साफ मुसलमान और इस्लाम का कनेक्शन देखा जा सकता है। तो यह फिर कैसे संचालित हैं। झारखंड में मुसलमान इलेक्ट्रिकल, इस्लामी होटल, केजीएन मोबाइल, इस्लामी बुक सेंटर, हलाल मीट, इत्यादि चलाए जा सकते हैं, जिसमें से उसी जमशेदपुर में सैकड़ों ऐसे प्रतिष्ठान चलाए जा रहे हैं जो जमशेदपुर पुलिस के नाक के नीचे चल रही है, क्या सरकार इन लोगों पर भी कार्रवाई करेगी।
लेकिन क्या जो सरकार अपने वोट बैंक के लालच में और सेकुलरता को दिखाने के लिए रांची के हिंदपीढ़ी जैसे मुस्लिम बहुल इलाके को मुसलमान अधिकारियों की तैनाती के बावजूद भी पूरी तरह से सील नहीं कर पाई है। जो सरकार मस्जिदों से पुलिस पर हो रहे हमलों पर उचित कार्रवाई नहीं कर पा रही है। उस कांग्रेस के इशारों पर चलने वाली हेमंत सोरेन की सरकार से यह उम्मीद कैसे किया जा सकता है।
अब सभी मामलों पर ध्यान देने के बाद एक बात तो साफ है कि अभी हेमंत सोरेन की सरकार बने छः माह भी ठीक से नहीं हुई और सैकड़ों ऐसी हिंदू विरोधी घटनाओं को सरकारी तंत्र और जिहादी तंत्र द्वारा अंजाम दिया जा चुका है। जिसमें दर्जनों लोगों की जानें चली गई है ।
अब हिंदू समाज को अपने मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार पर यह दबाव बनाना आवश्यक हो गया है ताकि आगे चलकर हिंदुओं पर हमला और ना बढ़े।
