भारतीय जीवन शैली का अनुसरण करे दुनिया, हर समस्या का शांतिपूर्ण हल सिर्फ भारतीय दर्शन से संभव: डॉ सुमन कुमार - एक संदेश भारत

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बुधवार, अगस्त 28, 2019

भारतीय जीवन शैली का अनुसरण करे दुनिया, हर समस्या का शांतिपूर्ण हल सिर्फ भारतीय दर्शन से संभव: डॉ सुमन कुमार



इतिहास साक्षी,सिर्फ सनातन धर्म से ही मानव सभ्यता सुरक्षित रह सकती है

भारतीय जीवन शैली का अनुसरण करे दुनिया, हर समस्या का शांतिपूर्ण हल सिर्फ भारतीय दर्शन से संभव: डॉ सुमन कुमार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक व हिन्दू जागरण मंच के क्षेत्रीय संगठन मंत्री,झारखण्ड-बिहार

हजारीबाग:राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक, हिन्दू जागरण मंच के अखिल भारतीय संगठन मंत्री, मान्यवर अशोक प्रभाकर जी के झारखण्ड प्रान्त में विभाग सह प्रवास के निमित बुधवार को हजारीबाग विभाग की बैठक ,यहां के स्थानीय राजेन्द्र इंटर कॉलेज में सम्पन्न हो गया। माननीय अशोक प्रभाकर जी ने सामाजिक जागरण,संगठन की आवश्यकता,व्यक्ति जागरण से राष्ट्र जागरण व आत्मनिर्माण के गुरु मन्त्र से अपने बौद्धिक में कार्यकर्ताओं को ऊर्जावान किया। संघ के वरिष्ठ प्रचारक,मंच के बिहार झारखण्ड क्षेत्रीय संगठन मंत्री डॉ सुमन कुमार जी ने कार्यकर्ताओं से  अपने जीवन को समाज,राष्ट्र व मानव हित में समर्पित करने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि सिर्फ सनातन धर्म से ही मानव सभ्यता सुरक्षित रह सकती है
विश्व समुदाय भारतीय जीवन शैली का अनुकरण करें, दुनिया के हर समस्या का शांतिपूर्ण हल भारतीय दर्शन से संभव है। 

डॉ सुमन जी ने भारतीय दर्शन,चिंतन,वेद,पुराण,साहित्य,प्राचीन भारतीय विरासत व जीवनचर्या पर गहरा प्रकाश डाला। और कहा, आज मानव सभ्यता उस कालखण्ड में आकर खड़ी है जहां से एक और दुनिया के अन्य मतावलम्बी,धर्मावलम्बी सिर्फ खुद के मजहब/धर्म की लड़ाई के लिए रक्तपात,खून-खराबा,बम विस्फोट,आतंकवाद,दूसरों के ज़मीन,देश हड़पने के लिय खूनी षड्यंत्रों में बीते करीब हजार साल से लगे हुए हैं। मानव सभ्यता को निर्दोष,मासूमों के खून व लाश के बिस्तर पर लोग अपने-अपने धर्मों के विस्तार व वर्चस्व स्थापित करने में प्रतिस्पर्धा के तरह आचरण कर रहे हैं जिससे मानवीय जीवन की सिसकी तक लोग नहीं सुन पा रहे,इतने स्वार्थ में धर्मांध हो गए!  वहीं दूसरी ओर, दुनिया के सबसे प्राचीन सभ्यता की जननी,भारत व सनातनी भूमि, संस्कृति,माटी व परिपाटी आज भी धर्म विस्तार के लालायित नहीं,आज भी इंसानियत का सच्चा पैगाम भारत की माटी के कण-कण से सुनाई दे रही है। धर्मविस्तार के खूनी मानसिकता से कोसों दूर मानवीय मूल्यों के संरक्षण व संवर्धन के लिए मानव सभ्यता के संजीवनी के तरह साबित हो चुका है भारत व सनातन हिन्दू धर्म। इस कारण विश्व विरादरी आत्मचिंतन करे,आत्म मूल्यांकन करें सभी धर्मप्रमुख आखिर प्राचीन काल से आजतक, किसने यथार्थ में मानवीय जगत को संजीवनी समान सींचा है और किसने अपने विस्तार के लिए सिर्फ निर्दोषों के खून से अपने धर्म का झंडा लहराने की रक्तरंजित अंध दौड़ में आज भी झुंड पर बढ़े जा रहे! ये अंतराष्ट्रीय जगत के लिए विचारणीय व चिंतनीय प्रश्न है जिसे भारत दुनिया के सामने बड़ी ही जिम्मेदारी से वैश्विक मंचो पर उठाएगा निकट भविष्य में।

कश्मीर का शांतिपूर्ण हल,दुनिया के लिए एक सबक, शांति स्थापना भारत से सीखे विश्व

इतिहास गंवाह है दुनिया के अधिकांश द्विपक्षीय सीमा विवाद कभी भी बिना युद्ध के हल नहीं हुए हैं। लेकिन 72 वर्षों के खूनी कैंसर का रुप ले चुके कश्मीर मसले को एक ही झटके में बिना एक गोली चले,बिना रक्तपात व बिना युद्ध के शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाकर भारत सरकार ने एक बार फिर से साबित करके दिखा दिया है, आज भी भारत शांति,सहिष्णुता,सर्वधर्मसमभाव, विश्वबन्धुत्व के प्राचीन विरासत के पाथेय पर ही अग्रसर है। कश्मीर हमारा ही था, सही मायने में भारत ने मोहम्मद अली जिन्ना को दहेज में पाकिस्तान नहीं दिया था। पाकिस्तान की माटी भारतभूमि का ही अंश था 1947 से पहले।

 भारत को विश्वगुरु बंनाने में लगें सभी देशवासी

 भारत का भविष्य स्वर्णिम
भारत का भविष्य स्वर्णिम है।वर्तमान कालखण्ड भारतीय इतिहास का स्वर्णिमयुग है। इस नूतन कालचक्र में सभी नकरामतक,काली ऊर्जा धारी लोगों का अब स्वयं वक्त के साथ हॄदय परिवर्तन हो जाएगा। अतीत के जख्मों को भूलकर नए भारत, एक भारत,श्रेष्ठ भारत व विश्वगुरु भारत निर्माण में सभी देशवासी जुट जाएं। तन व मन से सभी देशवासी भारतीय बनें,भारत को जानें,भारत को मानें,भारत का बनें और भारत को बनाएं यही काल व समय की मांग है और इसी पाथेय पर चलकर ही राष्ट्र की चतुर्दिक उन्नति सुनिश्चित है।

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