• समाज में सुधार की इच्छा, शौर्य, ऐसे अनेक गुणों के प्रतीक रहे छत्रपति शिवाजी महाराज का आदर्श हमें लेना चाहिए. और शिवाजी महाराज का अनुकरण कर आदर्श समाज निर्मिती के लिए प्रयास करना चाहिए – डॉ मोहन भागवत
• ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी को शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक समारोह रायगढ़ किले पर संपन्न हुआ
• शिवाजी महाराज उस जमाने में एक ऐेसे युगपुरुष हो गये, जिन्होंने विदेशी सल्तनत से खुद को अलग रखा और अपना स्वतंत्र राज्य निर्माण किया
• मतलब भारत भर म्लेच्छ राजा थे, उन को चुनौती देकर शिवाजी ने अपना स्वतंत्र राज्य निर्माण किया. यह घटना सामान्य नहीं थी
• छत्रपति शिवाजी महाराज ने 340 साल पहले स्वराज्य, स्वधर्म, स्वभाषा और स्वदेश के पुनरुत्थान के लिये जो कार्य किया है, उस की तुलना नहीं हो सकती. उनका राज्याभिषेक एक व्यक्ति को राजसिंहासन पर बिठाना, इतने तक सीमित नहीं था
• शिवाजी महाराज मात्र एक व्यक्ति नहीं, वे एक विचार और एक युगप्रवर्तन के शिल्पकार थे. भारत एक सनातन देश है, यह हिंदुस्थान है, तुर्कस्थान नहीं, और यहां पर अपना राज होना चाहिये. अपने धर्म का विकास होना चाहिये, अपने जीवनमूल्यों को चरितार्थ करना चाहिये
• शिवाजी महाराज का जीवनसंघर्ष इसी सोच को प्रस्थापित करने के लिये था. वे बार बार कहा करते थे कि, ‘यह राज्य हो, यह परमेश्वर की इच्छा है. मतलब स्वराज्य संस्थापना यह ईश्वरीय कार्य है. मैं ईश्वरीय कार्य का केवल एक सिपाही हुँ.
• ईश्वरीय कार्य की प्रेरणा उन्होंने अपने सभी सहकारियों में निर्माण की. हमे लड़ना है, लड़ाई जितनी है, वह किसी एक व्यक्ति के सम्मान के लिये नहीं, तो ईश्वरीय कार्य की पूर्ति के लिये हमको लड़ना है
• छत्रपति शिवाजी महाराज का शासन भोंसले घराने का शासन नहीं था. उन्होंने परिवार वाद को राजनीति में स्थान नहीं दिया. उनका शासन सही अर्थ में प्रजा का शासन था
• शासन में सभी की सहभागिता रहती थी. सामान्य मछुआरों से लेकर वेदशास्त्र पंडित सभी उनके राज्यशासन में सहभागी थे. छुआछूत का कोई स्थान नहीं था
• छुआ-छूत के ;लिए कोई जगह नही, पन्हाल गढ़ की घेराबंदी में नकली शिवाजी जो बने थे, उनका नाम था, शिवा काशिद. वे जाति से नाई थे. अफजलखान के समर प्रसंग में शिवाजी के प्राणों की रक्षा करनेवाला जीवा महाला था. और आगरा के किले में कैद के दौरान उनकी सेवा करने वाला मदारी मेहतर था
• महाराज का एक नियम था कि सूरज ढलने के बाद किले के दरवाजे बंद करने चाहिये और किसी भी हालत में किले के अंदर प्रवेश नहीं देना चाहिये. बड़ी कड़ाई से इस नियम का पालन किया जाता था
• शिवाजी महाराज ने मुसलमानी शासनकाल में लुप्त हो रही हिंदू राजनीति को फिर से पुनरुज्जीवित किया
• हिंदू राजनीति की विशेषता- पहली विशेषता यह है कि वह धर्म के आधार पर चलती है यहां धर्म का मतलब राजधर्म है राजा का धर्म प्रजा का पालन, प्रजा का रक्षण और प्रजा का संवर्धन है
• राजा, हिंदू राजनीति के सिद्धांतों के अनुसार उपभोग शून्य स्वामी है. प्रजा उसके लिये अपनी संतान के समान है. राज्य में कोई भूखा न रहे, किसी पर अन्याय न हो, इसकी चिंता उसे करनी चाहिये
• छत्रपति शिवाजी महाराज ने हिंदू राजनीति के सिद्धांतों का अपने राजव्यवहार में कड़ाई से अनुप्रयोग किया
• उनके मामाजी ने भ्रष्टाचार किया, शिवाजी महाराज ने उनको पद से मुक्त किया और अपने देश के बाहर निकाल दिया
• छत्रपति शिवाजी महाराज अपने को गो-ब्राह्मण प्रतिपालक कहा करते थे इसका मतलब यह नहीं कि ब्राह्मण जाति के प्रतिपालक थे. यहां ब्राह्मण शब्द का अर्थ होता है, धर्म का अवलंब करनेवाला, विधि को जाननेवाला. आज की परिभाषा में कहना है तो, महाराज यह कहते हैं कि यह राज्य कानून के अनुसार चलेगा
• छत्रपति शिवाजी महाराज ने हिंदू धर्म की रक्षा का बीड़ा उठाया था इसका मतलब यह नहीं की वे इस्लाम धर्म के दुश्मन थे. उन्होंने कभी भी कुरान की अवमानना नहीं की, ना कोई मस्जिद गिरायी, ना किसी फकीर को फाँसी के फंदे चढ़ाया उनका नौदल प्रमुख मुसलमान था
• धर्म की आड़ में अगर कोई हिंदू धर्म पर आघात करता दिखायी देता, तो शिवाजी उसे नहीं छोडते थे
• हम सब शिवाजी महाराज द्वारा लड़े युद्धों के बारे में जानते हैं, लेकिन यह नहीं जानते हैं कि लगभग 36 साल तक उन्होंने राजकाज किया और उसमें से केवल 6 साल भिन्न-भिन्न लड़ाइओं में उन्होंने बिताये. तीस साल तक वे एक आदर्श शासन की नींव रखने में कार्यरत रहे
• अपना स्वराज्य आर्थिक दृष्टि से स्वावलंबी और सशक्त बने, इसकी ओर शिवाजी महाराज का हमेशा ध्यान रहता था
• महाराज का सख्त आदेश था कि सेनादल को अपने लिये आवश्यक वस्तुओं, धान्य आदि बाजार में जाकर खरीदना चाहिये. किसानों से जबरदस्ती वसूल नहीं करना चाहिये. यदि कोई ऐसा करने का दुस्साहस दिखाता तो उसे कड़ी सजा मिलती थी
• आज हम देखते हैं कि चौराहे पर खड़ा पुलिसकर्मी पानवाले, पटरीवाले, चायवाले, और होटेलवाले से मुफ्त में माल लेता है. शिवाजी महाराज ऐसी लूट को सहन नहीं करते थे
• अपना सेनादल स्वयंपूर्ण रहे, इस पर छत्रपति शिवाजी महाराज काफी ध्यान दिया करते थे. तोपें बनाने का कारखाना उन्होंने बनवाया था. गोला-बारूद बनाने का उपक्रम उन्होंने शुरू कराया था. अच्छे घोड़ों की संतति निर्माण पर उनका ध्यान रहता था
• छत्रपति शिवाजी ने फ़ारसी के स्थान पर मराठी एवं संस्कृत भाषा को बढ़ावा दिया
• अंग्रेजों ने उनको अच्छे सिक्के बनाने का सुझाव दिया था.(मेटॅलिक कोइन्स) महाराज ने यह सुझाव ठुकरा दिया और कहा कि हमारे देसी कारीगर ही सिक्के तैयार करेंगे. राज व्यवहार भाषा का कोष उन्होंने तैयार किया और राज व्यवहार से पारसी, अरबी भाषा को निकाल दिया
• छत्रपति शिवाजी को पश्चिम भारत में शक्तिशाली मराठा राज्य स्थापना का श्रेय दिया जाता है| मुग़लशासक औरंगजेब से लम्बे समय तक संघर्ष के बाद 1674 में रायगढ़ में उनका राज्यारोहण हुआ और उने छत्रपति की उपाधि मिली
• छत्रपति शिवाजी को देशभक्ति व धर्म संस्कृति का ज्ञान प्रथम गुरु माता जीजाबाई से प्राप्त हुआ, उन्होंने बचपन में ही रामायण व महाभारत जैसे महाकाव्यों का पठन-पाठन कर लिया था
• 1664 में शिवाजी ने औरंगजेब के प्रमुख व्यापारिक केंद्र सूरत बंदरगाह पर पूरी तरह से कब्ज़ा कर लिया था जिससे औरंगजेब बहुत नाराज हुआ
• औरंगजेब ने आगरा में 5000 सैनिकों के पहरे में शिवाजी को नजरबन्द कर दिया लेकिन अपने पराक्रम,तेज बुद्धि और अचूक रणनीति से शिवाजी बेटे शम्भाजी के साथ वहां से सुरक्षित भाग निकले.
• हिन्दू पद पादशाही' के संस्थापक शिवाजी के गुरु रामदासजी का नाम भारत के साधु-संतों व विद्वत समाज में सुविख्यात है। उन्होंने 'दासबोध' नामक एक ग्रन्थ की रचना भी की थी, जो मराठी भाषा में है। सम्पूर्ण भारत में कश्मीर से कन्याकुमारी तक उन्होंने 1100 मठ तथा अखाड़े स्थापित कर स्वराज्य स्थापना के लिए जनता को तैयार करने का प्रयत्न किया
• शिवाजी महाराज ने जमींदारों को, वेतनदारी को रदद कर दिया| समाज के संपत्ति पर हम लोग ट्रस्टी रह सकते है| हम लोग अधिकारी नहीं बन सकते|
• शिवाजी महाराज ने सेना को स्वराज्य के केंद्रीय प्रशासन से वेतन देना प्रांरभ कर सैनिकों की व्यक्तिपरक निष्ठाओं को राष्ट्र परक बनाया|
• गरीब किसानों को उनके ज़मीन का स्तर व फसल के उत्पादन के आधार पर राहत देने वाली द्विस्तरीय वित्तीय कर प्रणाली उन्होंने लागू की|
• छत्रपति शिवाजी महाराज के कर्तव्य, गुण और चरित्र के द्वारा मिलनेवाला दिग्दर्शन आज की वैसी ही परिस्थिति में मार्गदर्शक है |आज भी अपने लिए अनुकरणीय है| - डॉ. मोहन भागवत
• कठोर, न्यायी, प्रजाहितदक्ष, प्रजाभिमुख और फिर भी सहृदय शासन उनका था| स्वयं शिवाजी महाराज नेतृत्व के आदर्श थे |
• शिवाजी हिन्दू संकृति का प्रचार किया करते थे। वह अक्सर दशहरा पर अपने अभियानों का आरम्भ किया करते थे।
• शिवाजी एक कट्टर हिन्दू थे, वह सभी धर्मों का सम्मान करते थे। उनके राज्य में मुसलमानों को धार्मिक स्वतंत्रता थी। शिवाजी ने कई मस्जिदों के निर्माण के लिए दान भी दिए था
• छत्रपति शिवाजी ने संस्कृत भाषा को बढ़ावा दिया| शिवाजी ने इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अपने किलों के नाम संस्कृत में रखे जैसे कि- सिंधुदुर्ग, प्रचंडगढ़, तथा सुवर्णदुर्ग।
• शिवाजी महाराज एक बहादुर, बुद्धिमान और निडर शासक थे। धार्मिक कार्य में उनकी काफी रूचि थी। रामायण और महाभारत का अभ्यास वह बड़े ध्यान से करते थे।
• यह केवल शिवाजी महाराज की विजय नहीं है। अपितु लडने वाले हिंदू राष्ट्र की अपने शत्रुओं पर विजय है। नए प्रकार का जो पराचक्र आया है, जो मात्र सत्ता और संपत्ति लूटता नहीं है, जो मनुष्य को ही बदल देने की चेष्टा करता है,
• छत्रपति शिवाजी महाराज ने 340 साल पहले स्वराज्य, स्वधर्म, स्वभाषा और स्वदेश के पुनरुत्थान के लिये जो कार्य किया है, उस की तुलना नहीं हो सकती.
• उनका राज्याभिषेक एक व्यक्ति को राजसिंहासन पर बिठाना, इतने तक सीमित नहीं था. शिवाजी महाराज मात्र एक व्यक्ति नहीं, वे एक विचार और एक युगप्रवर्तन के शिल्पकार थे
