5 अगस्त का दिन भारतीय इतिहास का बेहद खास दिन है. नरेंद्र मोदी सरकार ने कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले आर्टिकल 370 को खत्म करने का प्रस्ताव राज्यसभा में पेश कर दिया. जानिए आखिर आर्टिकल 370 जो जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देता है.
अनुच्छेद 35A से जम्मू-कश्मीर राज्य के लिए स्थायी नागरिकता के नियम और नागरिकों के अधिकार तय होते हैं. 14 मई 1954 के पहले जो कश्मीर में बस गए थे वही स्थायी निवासी हैं.
ये एक ऐसा कानून था जिसे संसद के सामने पेश किए बगैर की लागू कर दिया गया था. इसको बाद में राष्ट्रपति के आदेश के बाद जोड़ा गया था.इसके चलते स्थायी निवासियों को ही राज्य में जमीन खरीदने, सरकारी रोजगार हासिल करने और सरकारी योजनाओं में लाभ के लिए अधिकार मिले हैं.
आर्टिकल 370 के हटने पर सबसे ज्यादा फायदा देश के अन्य हिस्से के लोगों को होगा. वो अब कश्मीर में जाकर बस सकते हैं. सरकारी नौकरी कर पाएंगे. अब कश्मीर में सदर-ए-रियासत का पद मुख्यमंत्री कहलाएगा. ये आर्टिकल तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और नेशनल कॉन्फ्रेंस के शेख अब्दुल्ला के बीच हुए 1952 दिल्ली एग्रीमेंट पर आधारित है.
