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| डाॅ० सुमन कुमार |
हिंसा कभी हमारे समाज का अंग नहीं रहा, मोब लिंचिंग के दोषियों को कड़ी सजा मिले।
डॉ सुमन कुमार,राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक व हिन्दू जागरण मंच के क्षेत्रीय संगठन मंत्री,झारखण्ड-बिहार
भारतीय समाज के लिए कभी भी हिंसा का कोई स्थान नहीं रहा है। पूरे विश्व को हम एक परिवार मानकर जीवन जीते रहे हैं, अहिंसा व सभी को सम्मान हमारी विरासत है। बड़ी ही जिम्मेदारी से हम कहना चाहते हैं, जय श्री राम का उद्घोष कोई युद्ध का प्रतीक नहीं बल्कि शांति का साक्षात प्रमाण है। श्री राम भारतीय जनमानस के आराध्य देव है,आदर्श हैं,मर्यादापुर्षोत्तम हैं।शांति,सहिष्णुता व सभी धर्मों को सम्मान करना आरम्भिक काल से भारतीय संस्कृति व जीवन पद्धति का अभिन्न अंग रहा है। अब जो असहिष्णु गैंग सक्रिय हो रहा है,उसे अपने आकाओं के खोई हुई राजनीतिक जमीन तैयार करने लिए हाथ पैर मार रहे हैं। पूरे उत्तर पूर्व में कभी हिंसा होती रही इसके साथ कश्मीर,बंगाल,केरल में किये गए भीड़ के हिंसा पर कथित असहिष्णु गैंग की चुप्पी इनकी मूल षड्यंत्र को रेखांकित करता है। भीड़ का हिंसा का किसी भी सूरत में हमारा समाज,हिन्दू जागरण मंच कभी भी समर्थन करता ही नहीं। यदि कोई भी भीड़ के हिंसा में शामिल हो तो उसे तत्तकाल कड़ी सजा मिलनी चाहिए। इतिहास पलट कर देख लीजिए सभी। हिन्दू समाज शांति का उपासक रहा है। समझ मे ये नहीं आता, जब 1990 के दौर में कश्मीर से लाखों हिन्दू अल्पसंख्यों लोगों को वहां के स्थानीय बहुसंख्यक लोगों ने भीड़ के बल पर घर द्वार से भगाया तब भी बहुसंख्यक समाज चुपचाप मौन होकर शांति के राह पर चल पड़ा,आगे बढ़ गया था। क्या ये सब देश के लोग भूल गए हैं? तब तो हमारे समाज ने इतनी बड़ी प्रतिक्रिया नहीं दी थी! 1984 में भीड़ के बल पर हजारों सिखों का नरसंहार किया गया तब भी तो सिख समुदाय शांति के मार्ग चुनकर मौन रहा! यथार्थ में जब भी कभी सभी धर्मों का निरपेक्ष इतिहास मूल्यांकन करेगा तब सनातन धर्म व हमारी जीवन शैली शीर्ष पर अंकित होगी। जब से राष्ट्रवादी सरकार देश के मजबूती के लिए ऐतिहासिक कार्य कर रही है तब से समाज भी सुंगठित हो रहा है। कुछ हारे हुए विपक्षी पार्टियों के समर्थकों के लिए,सुंगठित हो रहे समाज ही दरअसल सबसे बड़ी दिक्कत है। इसी इरादतन लोग नित नए प्रपंचों से राष्ट्र के ऊपर,हमारे समाज के उर लांछन लगाने की साजिशें रच रहे हैं। कुछ लोगों के नजर में चुभ रहा है। कुछ लोग सामान्य घटनाओं को पूरे समाज की बदनाम,राष्ट की छवि को अपमान करके विश्व विरादरी के सामने भारत की नीचा दिखाने की नाकाम कोशिशें कर रहे हैं। सभी को भारतीय समाज के ऐतिहासिक चरण को अध्धयन करना चाहिए।
